टैगोर थियेटर में मंचित हुए दो नाटक बुलेट चाहिए एवं कुत्ते

चाइनीज सामान के बहिष्कार से लेकर दहेज एवं पुरुषों मानसिकता पर कटाक्ष 

टैगोर थियेटर में मंचित हुए दो नाटक बुलेट चाहिए एवं कुत्ते 

नाटक मंचित करते कैट के कलाकर 
चंडीगढ़, 14 अक्तूबर: स्वदेशी सामान की खरीद से लेकर चाइनीज सामान के बहिष्कार तक,  राज्यों से उठ कर भारतवासी होने के गर्व को महसूस करने की भावना तक, एवं लड़कों द्वारा दहेज को जायज बताने की समस्या दर्शाते नाटक बुलेट चाहिए ने जहां लोगों का ध्यान अनेक समस्याओं की तरफ खींचा, वहीँ कॉमेडी ने दर्शकों का मनोरंजन भी किया। 

टैगोर थियेटर में आज सांय चंडीगढ़ आर्ट थिएटर द्वारा डिपार्टमेंट कल्चरल अफेयर चंडीगढ़ के सहयोग से दो नाटकों बुलेट चाहिए एवं कुत्ते का आयोजन किया गया, जिनका निर्देशन रणजीत रॉय ने किया।  बुलेट चाहिए नाटक में छोटा भाई विक्की अपने बड़े भाई करण से कंप्लेंट करता है कि उसने अभी तो यह चाइनीज सामान खरीदा था और यह खराब भी हो गया, जिस पर बड़ा भाई उसे समझाता है कि  अब तो भारत में भी हर चीज बनती है तो उसे मेड इन इंडिया की चीजें ही खरीदनी चाहिए। इस पर छोटा भाई कहता है कि ठीक है भाई पंजाब की कसम अब चाइनीज चीजें नहीं खरीदूंगा, जिस पर बड़ा भाई फिर कहता है कि हमारे शहीदों ने भारत को अखंड भारत बनाए रखने के लिए अपनी जान दी है, पंजाब या दूसरे राज्य भारत के ही अंग हैं, तो हमें इन चीजों से भी ऊपर उठना है। 

करण की बहन को जो लड़के वाले देखने आते हैं, वे दहेज में बुलेट की मांग करते हैं, करण की बहन उस लड़के को पहचान लेती है की कॉलेज में हमेशा बिना दहेज के शादी करने की बात करता है, पूछने पर वह कहता है कि वो सब कहने की बातें थी, लाइफ में प्रैक्टिकल होना चाहिए। 

दूसरे नाटक कुत्ते में एक सोच को दर्शाया गया है, जिसमें पुरुषों की महिलाओं को सहज उपलब्ध वाली मानसिकता पर सटीक कटाक्ष किया गया है, जिसमें बताया गया है कि महिलाओं को ऐसे पुरुषों को सिखाना आना चाहिए न कि उस जगह से पलायन कर जाना चाहिए।  

नाटक बुलेट चाहिए में आदित्य, वासु, अक्षय, पूनम, विष्णु, सुखबीर कौर एवं राघव ने अभिनय किया तथा नाटक कुत्ते में नीलम, कोमल, लक्षय एवं आफताब ने अभिनय किया। संगीत इतिशा ने दिया एवं मंच सज्जा महिमा ने की। 


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