उमंग अभिव्यक्ति मंच ने कविताओं से दी वीर शहीदों को श्रद्धांजलि ( हेमा शर्मा)
आज उमंग अभिव्यक्ति मंच पंचकूला की ओर से ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, मंच की फाउंडर नीलम त्रिखा ने बताया कि अपने वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए और चीन के सामान का बहिष्कार करने हेतु उन्होंने इस कार्य क्रम का ऑनलाइन आयोजन किया, जिसमें सभी रचनाकारों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और चीन के हर सामान का पूर्ण रूप से बहिष्कार करने के लिए कहा है और स्वदेशी को अपनाने के लिए जोर दिया है। कार्यक्रम का संचालन सुप्रसिद्ध कवियत्री नीलम त्रिखा ने किया। गोष्ठी में मुंबई, लखनऊ,राजस्थान कैथल ,अंबाला, मोहाली, चंडीगढ़ व पंचकूला आदि अनेक स्थानों से कवयित्रियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।सभी की कविताएं देशभक्ति से लबालब थी।वहीं कुछ कवियित्रियों ने अपने काव्य में चीनी सामान के प्रति रचनाओं के माध्यम से विरोध भी प्रदर्शित किया तथा चीन में शहीद हुए सैनिकों को अपनी कविताओं के माध्यम से श्रद्धांजलि दी ।
गोष्ठी में काव्य की सभी शैलियों का प्रयोग किया गया। नीलम त्रिखा, राशि श्रीवास्तव, रजनी बजाज,नीरू मित्तल, रजनी पाठक, रजनी बजाज व ममता कालड़ा ने अपनी मधुर आवाज में सैनिकों श्रद्धांजलि अर्पित की। सुनीता राणा ने मै छोरी हरियाणे की कविता के माध्यम से चीनी वस्तुओं का बहिष्कार करने का संदेश दिया।
लखनऊ से प्रभा, कैथल से मधु गोयल, अनुपमा पराशर, आभा साहनी, नीरजा व रेणु अब्बी ने जहां अपनी कविताओं से देशभक्ति का रंग बिखेर दिया, वहीं परमिंदर सोनी, रेणुका चुघ, गीता उपाध्याय, दिलप्रीत तथा मुंबई से कुंती नवल ने अपनी पंक्तियों में "चीन के सामान का बहिष्कार हो," पर अपनी भावनात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की।
पहला रंग केसरी कर दे रंग है जो बलिदानों का..., संगीता शर्मा कुंद्रा ने अपनी कविता "हम मर कर जिंदा रहते हैं " के द्वारा हमारे वीर सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी, वहीं रजनी बजाज ने अपने वीर शहीदों के लिए कुछ यूं कहा कि किसी को लाल भाता है.. किसी को पीला भाता है.. मुझे तो बस केसरिया का रंग भाता है।


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