राष्ट्रीय कवि संगम ने दी शहीदों को दी श्रद्धांजलि
राष्ट्रीय कवि संगम इकाई चंडीगढ़ की ओर से एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें 96 साहित्यकारों की उपस्थिति में कविताओं के माध्यम से कवियों ने भारत चीन सीमा की गलवान घाटी पर शहीद हुए सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सबसे पहले अनिल चिंतित ने मंच संचालन करते हुए सरस्वती वंदना से काव्य संध्या का शुभारंभ किया। कवियों की कविताओं में चीन के प्रति भारी आक्रोश के साथ-साथ वतन पर जान लुटाने वालों के परिवारों के प्रति संवेदना, दर्द और टीस भरी थी। नीरज मनचंदा ने कहा कि तिरंगे पर जान को लुटाने चले हैं । लहू आज अपना बहाने चले हैं।।
विमला गुगलानी ने कहा-
जब देखो तब पंगे लेना, चीन की है फ़ितरत ,
पीठ पे सदा वार है करता , दुनिया में नहीं इज़्ज़त।।
अरुणा डोगरा ने इस अवसर पर सुनाया-
वतन के लिए मर मिटे जो वीर,
वो हमेशा याद आयेंगे।
शहीदों की शहादत को,
कभी न भूल पायेंगे।। तेरी हर निशानी याद रखेंगे हम,
हर वर्ष नहीं- हर क्षण।
नीरू मित्तल ने कहा-
ऐ भारत के वीर सपूतों, शत शत तुम्हें प्रणाम है।
हर दिशा में गूंज रहा, तुम्हारा ही यशगान है।।
दुश्मन के हर पैंतरे पर, अर्जुन सा संघान है।
शौर्य पराक्रम पर तुम्हारे, देश को अभिमान है।
रेणुका चुघ ने कहा-
व्यथित है हर इक ह्रदय, और अश्रुपूरित हर आँख है।
क्रोध में है देश सारा ,सीने में जल रही आग है।।
प्रोफेसर अलका काँसरा ने भी कहा-
शत शत नमन उनको
जो क़बूल करते
तिरंगे में लिपटा
भाई, बेटा, पति
अथवा पिता ।
हिसार की कवयित्री अनीता जैन ने कहा-
लिपट कर वीर के शव से तिरँगा आज ये बोला,
मेरी खातिर मेरे बच्चे जवानी दे गए अपनी।
वरिष्ठ कवयित्री आभा साहनी की पंक्तियाँ देखिए-
दफ़न कर दूँगा हर कोशिश
लहू दुश्मन का बहाऊँगा।
चीर दूँगा उस सीने को
जो माँ पर आँख उठाएगा।
राशि श्रीवास्तव ने कहा-
हमको ना मजबूर करो, बिन बात नहीं हम लड़ते हैं।
शेरों को ललकारा है, अब ये मुंह की खाएंगे,
हारेंगे वो हर बाज़ी, जब जिद पे हम आ जाएंगे।
परमिंदर सोनी ने शहीद की पत्नी को समर्पित भावों में कहा:- गोलियों की धुआंधार में, हुई पत्नी लहुलुहान है।
रंगहीन उसका है रक्त, सूना अब उसका जहान है।।
नीरज शर्मा ने कहा:-
चायना बहिष्कार..हमारे सैनिकों को हमारी यही है सच्ची श्रद्धांजलि।
हम भारतवासी करेंगें चायनीज चीजों की ताला बंदी।।
सुरेखा यादव ने कहा:- भाग पड़ोसी भाग देश का जन-जन तुझे भगाता। आज नहीं तो कल भागेगा बच्चा बच्चा गाता है।।
लुधियाना के वरिष्ठ कवि ए पी मौर्य ने कहा:-
सुर्खियों में आया नाम उनका शहादत के बाद,
सियासती लोग भाषण से ही सुर्खियां बटोर ले गए।।
हाँसी की कवयित्री दर्शना सुभाष की भावुकता भरी पंक्तियाँ:-
आ पुत्र, सेहरा है तैयार।
सब तेरी देखें राह, हाय! यह हुआ क्या, झंडे में लिपट तू आया द्वार।।
संतोष गर्ग ने शहीद की मां को याद करते हुए कहा:-
मां बेचारी रोज-रोज गुरुद्वार जाती थी।
बच्चा जंग जीत आए मन्नत मनाती थी।।
कभी रोए, कभी हँसे दर्द दवाती थी। आँसू झट पोंछकर चश्मा चढ़ाती थी।।
इनके साथ ही रजनी बजाज, सुरेंद्र,धवन मोहन, जसविंदर फिगार, इंद्र वर्षा, अंशुल बत्रा, संगीता शर्मा, हरेंद्र सिन्हा, मंजू बिसला, माधुरी शर्मा, बिजेंद्र चौहान, नेहा शर्मा, एम एल अरोड़ा, डाक्टर अनीश गर्ग ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

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